क्या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ.. अभियान को भूल गए हैं शिक्षक

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हरलाखी/मधुबनी/संवाददाता
एक तरफ जहां राज्य सरकार सूबे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे करती है वहीं सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाएं एमडीएम रसोइया के रहने के बावजूद खुद ही बर्तन भी धोती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूलों में बर्तन धोएगी बेटियां तो कैसे पढ़ेगी बेटियां! क्या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को भूल गए हैं शिक्षक। आखिर सरकारी स्कूलों में सरेआम बदहाल शिक्षा व्यवस्था के जिम्मेदार कौन हैं। शिक्षक, अभिभावक या शिक्षा विभाग खुद!

मामला हरलाखी प्रखंड के विद्यालयों का ही नहीं है, बल्कि सूबे के सभी सरकारी विद्यालयों में सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था चौपट है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार विद्यालयों में तमाम सुविधाएं दे रखी हैं और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एमडीएम व इसके संचालन के लिए रसोइया भी बहाल किये गए हैं इसके बावजूद शिक्षकों द्वारा यह अनियमितता शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही है।

शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने व बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने के बजाए जब शिक्षक बालिकाओं से सफाई कर्मी का काम करवाएंगे तब तो शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
हरलाखी से अब्दुल माजिद कि खबर

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