भारत के सबसे लोकप्रिय कवि, कथाकार एवं निबंधकार

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रामधारी सिंह दिनकर

भारतीय साहित्य और राजनीति का एक ऐसा व्यक्तित्व जिसपर आज भी बिहार और पूरा भारत गर्व करता है। रामधारी सिंह दिनकर भारत के सबसे लोकप्रिय कवि, कथाकार एवं निबंधकार थे। वे छायाओत्तर काल के सबसे प्रमुख कवि थे। इनका जन्म बिहार के बेगुसराई जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। इन्होंने अपनी पढ़ाई पूर्व के ऑक्सफ़ोर्ड कही जाने वाली पटना कॉलेज से की थी।

 

इन्होने वहाँ से इतिहास में स्नातक किया था। स्वतंत्रता से पूर्व उन्होंने खुद को विद्रोही कवि के रूप में स्थापित किया और स्वतंत्रता बाद देश ने उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि से नवाज़ा। दिनकर जी वीर रस के कवि थे। इनकी कविताओं में ओज, विद्रोह, आक्रोश, क्रांति और राष्ट्रवाद के साथ-साथ कोमल श्रृंगार का भी समावेश है। इन दो प्रवृतियों का चरमोत्कर्ष हमें रेणुका, कुरुक्षेत्र और उर्वशी जैसी इनकी प्रमुख कृतियों में देखने को मिलता है। इन्होंने कुरुक्षेत्र में महाभारत की कहानी को केंद्र में रखते हुए द्वितीय विश्वयुद्ध के परिपेक्ष्य में लिखा था कि युद्ध कोई नहीं चाहता लेकिन अगर आखिरी विकल्प हो तो सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।


दिनकर जी अपनी लेखनी के सबसे बड़े आलोचक थे। वे समय समय पर अपनी रचनाओं की पड़ताल करते रहते थे। वे परिवर्तनजीवी थे और समय के साथ उन्होंने अपनी शैलियों में परिवर्तन भी किया। रेणुका और कुरुक्षेत्र का कवि उर्वशी का बिल्कुल भी नहीं लगता था। उर्वशी को लिखकर वो खुद भी इस बात के लिए आश्चर्य में थे। उर्वशी में प्रेम, वासना, श्रृंगार और आध्यात्म का अद्दभुत संगम है। इस रचना के पात्र अप्सरा उर्वशी और उनके प्रेमी पुरुरवा थे। यह कहानी महाभारत के शान्ति पर्व से उठाई गयी थी। यह रचना प्रेम की कथनशैली और शक्तिमत्ता को प्रदर्शित करती है। दिनकर जी सत्ता के बेहद करीबी थे, इसके बाद भी वो जनकवि बने रहे। वो तीन बार कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रहे लेकिन कई ऐसी कहानियाँ हैं जिसमें उन्होंने सत्ता को भी अपनी पंक्तियों में घसीटा है।

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