लोक नृत्य “जाट–जाटिन”

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भारत भिन्नता में अभिन्नता का देश है। कई तरह के रश्मों, रिवाज, रीतियां भारत के गली गली में समाई है। इसी भारत का एक राज्य है बिहार , गौतम बुद्ध ,माता सीता जैसी देवी देवताओं की जन्मभूमि। बिहार की पहचान मिथिला पेंटिग, लिट्टी चोखा, छठ पूजा,भोजपुरी भाषा , दिलदार और मेहनती लोगों से ही है। साथ ही यहां की संस्कृति भी काफी समृद्ध है। यहाँ के गीत- नृत्य पुरखों से अभी तक चले आ रहे हैं। इन्हीं संस्कृति से जुड़े कला का एक पहलू है जाट–जाटिन नृत्य।

 

जाट जाटिन बिहार का एक प्रकार का लोक नृत्य है। यह उत्तरी बिहार में बिहार के अन्य भागों से ज्यादा मशहूर है। मिथिला व कोशी में यह काफी लोकप्रिय है। जाट जाटिन महिलाओं का नृत्य है व इसे ज्यादातर मॉनसून की चांदनी रातों में किया जाता है। किशोरियां एवम् घर की महिलाएं एकसाथ आंगन में सम्मिलित होती है और ड्रम के आवाज पर इस नृत्य को प्रस्तुत करती हैं। यह नृत्य सूर्य अस्त से लेकर सूर्योदय तक किया जाता है।

एक तरह से यह नृत्य जाट जाटिन की प्रेम कहानी को दर्शाता है। जो एक वक़्त में अलग हो गए थे और उन्हें काफी संघर्ष से जीवन व्यतीत करना पड़ा था। मगर इसके अलावा भी सुख, दुख ,मनोरंजन ,गरीबी , छोटी मोटी नोंक झोंक को भी यह नृत्य परिभाषित करता है।

यह नृत्य दो गुटों में प्रस्तुत किया जाता है। एक तरफ महिलाओं और लड़कियां जाटिन बनती हैं वहीं दूसरी  तरफ लोग जाटिन। यह नृत्य जोड़ी में प्रस्तुत किया जाता है।  ददरा ,तीवता, केरवा यानी के धुन पर इसपर नृत्य मुद्राएं की जाती है। इस नृत्य में पैरों के थिरकन से सुंदरता आती है। ये देखने में अत्यंत मनमोहक लगते हैं। यह नृत्य काफी सहज होता है पर देखने में उतना ही मनोरम लगता है। कुछ खास तरह की भावना को प्रदर्शित करने के लिए महिलाएं मुखौटा भी इस्तमाल करती है।

 

source : internet

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